एक दौड ऐसे भी लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
एक दौड ऐसे भी लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
शुक्रवार, 29 सितंबर 2017
रविवार, 17 सितंबर 2017
ओलंपिक खेलों से जुड़ी कुछ रोचक जानकारियां
ओलम्पिक खेल
मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
| ओलम्पिक खेल |
| संगठन |
|---|
| Games |
|
ओलम्पिक खेल वर्तमान की प्रतियोगिताओं में अग्रणी खेल प्रतियोगिता है जिसमे हज़ारों एथेलीट कई प्रकार के खेलों में भाग लेते हैं। ओलम्पिक की शीतकालीन एवं ग्रीष्मकालीन प्रतियोगिताओं में २०० से ज्यादा देश प्रतिभागी के रूप में शामिल होते हैं। ओलम्पिक खेल प्रत्येक चार वर्ष के अंतराल से आयोजित किये जाते हैं। ओलम्पिक खेलों का आयोजन अन्तर्राष्ट्रीय ओलम्पिक समिति करती है।
इतिहास
ओलम्पिक खेलों (1896-2016) का इतिहास बहुत पुराना है। प्राचीन ओलम्पिक खेलों का आयोजन 1200 साल पूर्व योद्धा-खिलाड़ियों के बीच हुआ था।पुराने समय में शांतिपूर्ण समय अंतराल के दौरान योद्धाओं के बीच प्रतिस्पर्धा के साथ खेलों का विकास हुआ। शुरुआती दौर में दौड़, मुक्केबाजी, कुश्ती और रथों की दौड़ सैनिक प्रशिक्षण का हिस्सा हुआ करते थे। इनमें से सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले योद्धा प्रतिस्पर्धी खेलों में अपना दमखम दिखाते थे।
ओलम्पिक 2016 ब्राजील के शहर रिओ डी जेनेरियो में 5 अगस्त से 21 तक चला !
प्राचीन काल में यह ग्रीस यानी यूनान की राजधानी एथेंस में 1896 में आयोजित किया गया था। ओलंपिया पर्वत पर खेले जाने के कारण इसका नाम ओलम्पिक पड़ा।[ओलम्पिक में राज्यों और शहरों के खिलाड़ी भाग लेते थे। इसकी लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि ओलम्पिक खेलों के दौरान शहरों और राज्यों के बीच लड़ाई तक स्थगित कर दिए जाते थे। इस खेलों में लड़ाई और घुड़सवारी काफी लोकप्रिय खेल थे। लेकिन उसके बाद भी सालों तक ओलम्पिक आंदोलन का स्वरूप नहीं ले पाया। तमाम सुविधाओं की कमी, आयोजन की मेजबानी की समस्या और खिलाड़ियों की कम भागीदारी-इन सभी समस्याओं के बावजूद धीरे-धीरे ओलम्पिक अपने मक़सद में क़ामयाब होता गया। प्राचीन ओलम्पिक की शुरुआत 776 बीसी में हुई मानी जाती है।
प्राचीन ओलम्पिक में बाक्सिंग, कुश्ती, घुड़सवारी के खेल खेले जाते थे। खेल के विजेता को कविता और मूर्तियों के जरिए प्रशंसित किया जाता था। हर चार साल पर होने वाले ओलम्पिक खेल के वर्ष को ओलंपियाड के नाम से भी जाना जाता था। ओलम्पिक खेल अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होने वाली बहु-खेल प्रतियोगिता है। इन खेलोमे भारत गोल्ड मेड्ल प्राप्त कर चूका है। एक अन्य दंतकथा के अनुसार हरक्यूलिस ने ज्यूस के सम्मान में ओलम्पिक स्टेडियम बनवाया गया। छठवीं और पांचवीं शताब्दी में ओलम्पिक खेलों की लोकप्रियता चरम पर पहुंच गई थी। लेकिन बाद में रोमन साम्राज्य की बढ़ती शक्ति से ग्रीस खासा प्रभावित हुआ और धीरे-धीरे ओलम्पिक खेलों का महत्व गिरने लगा।
393 ईस्वी के आसपास ओलम्पिक खेल ग्रीस यानी यूनान में बंद हो गया।[2] 1896 के बाद वर्ष 1900 में पेरिस को ओलम्पिक की मेजबानी का इंतज़ार नहीं करना पड़ा और संस्करण लोकप्रिय नहीं हो सके क्योंकि इस दौरान भव्य आयोजनों की कमी रही। 2008 में चीन की राजधानी बीजिंग ओलम्पिक में अब तक का सबसे अच्छा आयोजन माना गया है। पंद्रह दिन तक चले ओलम्पिक खेलों के दौरान चीन ने ना सिर्फ़ अपनी शानदार मेज़बानी से लोगों का दिल जीता बल्कि सबसे ज़्यादा स्वर्ण पदक जीत कर भी इतिहास रचा। भारत ने भी ओलम्पिक के इतिहास में पहली बार १९२८ में स्वर्ण पदक जीता और उसे पहली बार एक साथ तीन पदक भी मिले। विश्व के प्राचीनतम अंतरराष्ट्रीय खेल समारोह ओलम्पिक का आयोजन 2012 का लंदन ओलम्पिक खेल 27 जुलाई से 12 अगस्त के बीच हुआ था। इस बार के लंदन ओलम्पिक में 26 खेलों में 204 देशों के लगभग 10500 खिलाड़ीयों ने भाग लीया था। इस बार भारत ने ओलम्पिक में रजत, कांस्य पदक जीता था।
सोमवार, 11 सितंबर 2017
मरियप्पन थान्गावेलु
मरियप्पन थान्गावेलु
मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
| व्यक्तिगत जानकारी | |||||||||||||
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| पूरा नाम | मरियप्पन थंगावेलु | ||||||||||||
| जन्म | 28 जून 1995 (आयु 22) Periavadagampatti, सालेम जिला, तमिल नाडु, भारत | ||||||||||||
| खेल | |||||||||||||
| देश | |||||||||||||
| खेल | एथलेटिक्स | ||||||||||||
| प्रतिस्पर्धा | हाई जम्प - टी42 | ||||||||||||
| उपलब्धियाँ एवं खिताब | |||||||||||||
| पैरालिम्पिक फाइनल | 2016 ग्रीष्मकालीन पैरालंपिक्स: हाई जम्प (टी42) – स्वर्ण | ||||||||||||
पदक अभिलेख[छुपाएँ]
| |||||||||||||
मरियप्पन थान्गावेलु (जन्म 28 जून 1995) दक्षिण भारतीय उच्च जम्पर (हाई जंपर) हैं। रियो डी जनेरियो में आयोजित 2016 ग्रीष्मकालीन पैरालम्पिक खेलों में स्वर्ण पदक जीता।
अनुक्रम
[छुपाएँ]प्रारंभिक जीवन
मरियप्पन का जन्म सालेम जिले एक गरीब परिवार में हुआ। मरियप्पन की मां सरोजा देवी पहले विधवा दिहाड़ी मजदूर थीं और ईंट उठाने का काम करती थीं। जब सरोजा को छाती में दर्द की बीमारी हुई तो मरियप्पन ने किसी से पांच सौ रुपए उधार लिए, और अपनी माँ से कहा कि वे सब्जियां बेचने का काम करें। तब से अकेले ही सब्जियां बेचकर सरोजा देवी ने मरियप्पन और उनके चार सहोदरों का पालन-पोषण किया। एक समय तो ऐसा भी था की कोई इस परिवार को किराए पर घर नहीं देता था। पैरालम्पिक खेल शरू होने के समय मरियप्पन का सारा परिवार पांच रुपए महीने के किराए पर एक छोटे से घर में रहता है।
एक बस ने पांच-वर्षीय मरियप्पन को टक्कर मार दी। इस दुर्घटना में उनका एक पैर कट गया। 17 वर्ष तक अदालत के कई चक्कर काटने के बाद मरियप्पन के परिवार को 2 लाख रुपए मुआवज़ा मिला। पर इसमें से 1 लाख रुपए वकीलों की फीस में चले गए। बाके के 1 लाख रुपए सरोज अम्मा ने मरियप्पन के भविष्य के लिए एक बैंक खाते में जमा कर दिए। सरोजा देवी ने मरियप्पन के इलाज के लिए 3 लाख का ऋण लिया था जो 2016 तक चुकाया नहीं गया है।
गरीबी के वजह से मरियप्पन के बड़े भाई टी कुमार स्कूल के आगे नहीं पढ़ पाए। लेकिन मरियप्पन ने छात्रवृत्ति के बल पर ए.वी.एस. महाविद्यालय से बीबीए की डिग्री पूरी की। इसी महाविद्यालय के द्रविड़ शारीरिक शिक्षा निदेशक ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उन्हें प्रोत्साहन दिया। इसके बाद बैंगलुरू के द्रविड प्रशिक्षक सत्या नारायण ने मरियप्पन को दो साल तक हर महीने 10 हज़ार रुपए और प्रशिक्षण दिया।
खेल करियर
बचपन में मारियप्पन को वॉलीबॉल खेलना अच्छा लगता था और अपने एक पैरे के खराब हो जाने के बावजूद वे इसे खेलते रहे। एक बार इनके शिक्षक ने कहा कि वे ऊंची कूद में हाथ क्यों नहीं आजमाते। मारियप्पन को बात जंच गई और 14 साल की उम्र में इन्होंने पहली बार ऊंची कूद की प्रतिस्पर्धा में हिस्सा लिया, वो भी सामान्य एथलीटों के खिलाफ। उस प्रतिस्पर्धा में वे दूसरे स्थान पर रहे।
2016 पैरालंपिक
2016 में मरियप्पन के चयन पैरालम्पिक खेलों की भारतीय टीम में हो गया। वरुण सिंह भाटी ने इस स्पर्धा में कांस्य पदक ही जीत पाए। केंद्र सरकार ने मरियप्पन को 75 लाख रुपये दिए, वहीं तमिलनाडु की मुख्यमंत्री श्रीमती जयललिता ने उन्हें बतौर पुरस्कार 2 करोड़ रुपये देने की घोषणा की है।
सदस्यता लें
संदेश (Atom)